पिछले दिनों मैंने एक खबर देखी। अमर्त्य सेन ने चाइना में कहा की गाँधी या बुद्ध ने ग्लोबल वोर्मींग के बारे में कुछ नही कहा था। ये बेहद अजीब बात है । कल आप कहेंगे उन्होंने गे संबंधो के बारे में कुछ नही कहा था। हर दौर की अपनी समस्याए होती हैं और आम तौर पर उस दौर में उसी पर चर्चा होती है। मुझे नही लगता है कि बुद्ध या गाँधी के दौर में ग्लोबल वोर्मींग कोई बड़ी समस्या थी।
एक बात मैं और निश्चित तौर पर कह सकता हूँ कि सेन साहब ने गाँधी और बुद्ध को कभी भी नही पढ़ा है। ये दोनों आवश्यकताओ को काम करने पर बल देते थे । गाँधी जी का कहना था प्रकिती आपकी आवश्यकताओ को तो पूरा कर सकती है लेकिन aapki vasnao ki nahi. ye bayan global worming se ladne ka ekmatra mantra hai. sen sahab kahi aapko bharat me election ladne ka mood to nahi hai ? kyonki aajkal jab koi nayee partee banata hai to sabse pahle gandhi ko bhala bura kahta hai. baspa, shivsena aur bjp in tareeko ke jariye kafee malai kha chuki hain. lekin ek baat kath ki handee bar-bar nahi chadti hai
Friday, November 13, 2009
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